छतरपुर। जैन धर्मावलंबियों के दस दिवसीय दस लक्षण धर्म(पर्युषण पर्व) के अंतर्गत 3 सितंबर को उत्तम तप धर्म नगर के श्रावकों द्वारा धार्मिक प्रभावना के साथ मनाया गया। आज 4 सितंबर को पर्युषण पर्व के आठवें दिन उत्तम त्याग धर्म मनाया जाएगा। इस पर्व पर नगर के सभी मंदिरों में विभिन्न धार्मिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम देखने को मिल रही है।
डा. सुमति प्रकाश जैन के अनुसार नगर के सभी जैन मंदिरों में अल सुबह ही धार्मिक क्रियाएं प्रारंभ हो जाती हैं। श्रावक पूरे मनोयोग से श्री जी का पूजन अभिषेक करते हैं और दिन में केवल एक बार ही सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं, जिसे एकात कहते हैं। जैन व्यवसायी बंधु पूजन पाठ और एकात से निवृत होकर ही देर से अपने व्यावसायिक प्रतिष्ठान खोलते हैं। प्रतिदिन मंदिरों में चलने वाले सभी प्रवचनों तथा सांस्कृतिक आयोजनों का लाभ भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु लेते है।
प्रो. जैन के मुताबिक धर्म के दस लक्षणों में से आठवां धर्म उत्तम त्याग धर्म गुरुवार 4 सितंबर को मनाया जाएगा। उत्तम त्याग धर्म की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए बताया गया है कि त्याग का तात्पर्य छोडऩा है और जीवन को संतुष्ट बना कर अपनी इच्छाओं को वश में करना है। न केवल दौलत, वरन कषाय,मोह, राग, द्वेष, अहंकार छोडऩा ही त्याग धर्म है।छोडऩे की भावना जैन धर्म में सबसे अधिक है क्योंकि जैन संत सिर्फ घर – बार ही नहीं, वरन कपड़े भी त्याग देते हैं और पूरा जीवन दिगंबर मुद्रा धारण करके बिता देते है। व्यक्ति की शक्ति इससे नहीं परखी जाती की उसके पास कितनी धन – दौलत है बल्कि इससे परखी जाती है कि उसने कितना छोड़ा ,कितना त्याग किया है। उत्तम त्याग धर्मे हमें यही सिखाता है कि मन को संतोषी बना कर ही इच्छाओं और भावनाओं का त्याग करना मुमकिन है। दान करने से पुण्य बन्ध होता है, त्याग करना धर्म है। लेकिन त्यागी जो त्याग देता है फिर उसके बारे में नहीं सोचता। त्याग धर्म है, जिसे करने से आत्मा को बल मिलता है, मोक्ष मार्ग का रास्ता प्रशस्त होता है।
जयजय अतिशय क्षेत्र डेरा पहाड़ी जैन मंदिर में रात्रिकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अब तक फैंसी ड्रेस स्पर्धा, गु्रप मंगलाचरण,अतिशय एक मिनट,उमंग वाहिनी ग्रुप द्वारा कार्यक्रम, अक्षय निधि, समय के साथ एवं पाठशाला के बच्चों के कार्यक्रम की लुभावनी प्रस्तुतियां हुई है, जिसका खूब आनंद लिया गया।
जैन समाज के अध्यक्ष अरूण जैन अन्नू एवं समस्त कार्यकारिणी ने 6 सितंबर को संपन्न होने वाले पर्युषण पर्व के शेष बचे दिनों में सभी कार्यक्रमों का भरपूर धर्म लाभ लेने का आव्हान किया है।










