छतरपुर। जैन समाज का दस दिवसीय पर्युषण पर्व धार्मिक और आध्यात्मिक उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। मंगलवार को छठे दिन उत्तम संयम धर्म का पालन किया गया, जबकि आज बुधवार को उत्तम तप धर्म की साधना होगी। छठवें दिन आर्यिका ऋजुमती माता जी ने संयम की महत्ता बताते हुए कहा कि यह जीवन को ऊर्जा प्रदान करता है।
मंगलवार को उत्तम संयम धर्म पर प्रवचन देते हुए आर्यिका ऋजुमती माता जी ने कहा कि संयम के बिना जीवन बिना ब्रेक की गाड़ी जैसा है। नियम और संयम का पालन करने वाला श्रावक ही श्रेष्ठ माना जाता है। उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में संकल्प और संयम अपनाने की सलाह दी। डॉ. सुमति प्रकाश जैन ने बताया कि बुधवार को पर्युषण पर्व के सातवें दिन उत्तम तप धर्म मनाया जाएगा। इस दिन बड़े जैन मंदिर में आर्यिका ऋजुमती माता जी और सांगानेर अतिशय क्षेत्र डेरापहाड़ी जैन मंदिर में पं. उमेश जैन शास्त्री प्रवचन देंगे। उत्तम तप धर्म को अध्यात्म का मूल आधार माना गया है। तप शरीर को कष्ट देकर किया जाता है, जैसे सोने को तपाकर आभूषण बनाया जाता है। ठीक वैसे ही, तप के माध्यम से आत्मा को परमात्मा की ओर ले जाया जा सकता है। भगवान आदिनाथ ने छह महीने तक कठोर तप-साधना कर मोक्ष प्राप्त किया था। वर्तमान में ऐसी कठोर साधना संभव न हो, लेकिन तप की भावना अपनाई जा सकती है। तप का अर्थ अपनी इच्छाओं को मर्यादित करना और विवेकपूर्ण ढंग से उन्हें नियंत्रित करना है। यह कर्म निर्जरा का मार्ग है, जो मोक्ष की प्राप्ति का हकदार बनाता है। उल्लेखनीय है कि 1 सितंबर को बड़े जैन मंदिर के हाल में जैन आरती प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने मोहक प्रस्तुतियां दीं। शहर के अन्य जैन मंदिरों में भी प्रतिदिन रात को ज्ञानवर्धक और रोचक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। पर्युषण पर्व का समापन 6 सितंबर को होगा, जिसके बाद 9 सितंबर को क्षमावाणी पर्व और पालकी महोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।










