
छतरपुर। छतरपुर का जिला अस्पताल एक बार फिर अपनी चिकित्सा सेवाओं के लिए सुर्खियों में है। बताया गया है कि हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि सोनी ने चार नवजात बच्चों के टेढ़े-मेढ़े पैरों का जटिल ऑपरेशन कर उन्हें विकलांगता से बचाया है। इनमें से एक बच्चे को मेनिनजियो मायलोसेल जैसी दुर्लभ सिंड्रोमिक बीमारी थी, जिसका जोखिम भरा ऑपरेशन भी सफलतापूर्वक किया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल में जन्मे दिव्यांशु यादव नामक बच्चे को जन्मजात विकलांगता थी, जिसमें उसकी रीढ़ की हड्डी के पास मांस के रूप में सूजन थी और पैर पूरी तरह टेढ़े-मेढ़े थे। इस स्थिति को देखकर परिजन भयभीत हो गए और इलाज के लिए इधर-उधर भटकने लगे। किसी की सलाह पर उन्होंने डॉ. रवि सोनी से संपर्क किया। डॉ. सोनी ने परिजनों को बीमारी और इलाज की प्रक्रिया विस्तार से समझाई, जिससे उनका डर कम हुआ। परिजनों ने हिम्मत जुटाकर इलाज शुरू करवाया। छह प्लास्टर के बाद बच्चे का एक छोटा ऑपरेशन किया गया, जो पूरी तरह सफल रहा। डॉ. सोनी ने बताया कि मेनिनजियो मायलोसेल एक दुर्लभ बीमारी है, जो लाखों में किसी एक बच्चे को होती है। इसमें रीढ़ की हड्डी के पास सूजन के साथ जन्मजात असामान्यताएं होती हैं, और कई मामलों में दिल में छेद की समस्या भी हो सकती है। समय पर इलाज से बच्चा पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है। डॉ. सोनी ने बताया कि इस तरह की सिंड्रोमिक बीमारी के साथ टेढ़े-मेढ़े पैरों का इलाज जटिल होता है, लेकिन सही समय पर हस्तक्षेप से बच्चे सामान्य जीवन जी सकते हैं। चार बच्चों के एक साथ सफल ऑपरेशन ने न केवल उनके परिवारों को राहत दी, बल्कि जिला अस्पताल की क्षमताओं को भी उजागर किया। परिजनों ने डॉ. सोनी और अस्पताल स्टाफ का आभार जताया। डॉ. सोनी इससे पहले भी जिला अस्पताल में कई जटिल ऑपरेशन कर चुके हैं, जिनमें हड्डी के कैंसर जैसे जोखिम भरे मामले शामिल हैं, जो आसपास के मेडिकल कॉलेजों में भी मुश्किल माने जाते हैं।








