

टीकमगढ़। सौरभ खरे। वैसे तो यूं भी जान टी-स्टाल शहर का ऐसा टी-स्टाल है, जिससे शायद ही र्को ऐसा हो, जो परिचित नहीं हो। इन दिनों यह टी-स्टाल और जान भाई दोनों की चर्चाओं में बने हुए है। चर्चा का कारण कुछ और नहीं, बल्कि सौफिया कुरैशी की बहादुरी ही है। जान कुरैशी कोई और नहीं कर्नल सौफिया कुरैशी के सगे चाचा हैं, जो नौगांव से यहां आकर रहने लगे हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच चल रही जंग के दौरान बुंदेली धरा की बेटी कर्नल सौफिया कुरैशी अपनी वीरता और साहस के कारण आज सारे देश में अपनी पहचान बनाए हुए हैं। उनके अदम्य साहस और निडरता के किस्से बच्चा-बच्चा की जुबान पर हैं। पड़ौसी जिला छतरपुर के सैनिक छावनी नौगांव की निवासी फौजी परिवार में पली बढ़ी हुई सौफिया की बहादुरी की गाथा सुनकर लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहता। भारतीय सेनाकी यह 35 वर्षीय अधिकारी सिग्रल कोर से है। यहां बता दें कि वह एक्सरसाइस फोर्स 18 में टुकड़ी का नेतृत्व करने वाली पहली भारतीय महिला हैं। वहीं यूएन मिशन कांगो में मिलिट्री ऑब्जर्वर रह चुकीं हैं। भारतीय सेना में अपने जौहर दिखाने वाली बुंदेली बेटी सौफिया कुरैशी की वीरता और निडरता पर नौगांव में तो खुशी का माहौल कमाल का देखा ही जा रहा है, वहीं टीकमगढ़ भी इस खुशी से वंचित नहीं है। कारण यह है कि सौफिया के चाचा यहां निवास करते हैं, जिन्हें बधाईयां देने वालों का जहां तांता लगा हुआ है, वहीं उनके परिवार में भी खुशी का ठिकाना नहीं है। नौगांव हाल टीकमगढ़ निवासी जान मुहम्मद और उनके परिवार में इन दिनों खुशी का माहौल बना हुआ हैं। जान भाई कहते हैं कि उनकी भतीजी सौफिया ने सारे परिवार को जो गौरवान्वित किया है, उसका बखान कर पाना संभव नहंी हैं। नौगांव निवासी जान कुरैशी एवं उनका परिवार यहां लंबे समय से रहता आ रहा है। वह यहां टी स्टाल का संचालन करते हैं। जैसे ही लोगों को पता चला कि सौफिया कुरैशी स्थानीय निवासी जान मुहम्मद की भतीजी है, लोगों का उनकी दुकान पर मेला लग गया। लोग बधाईयां देने में लगे हैं। उन्होंने कहा कि आज सौफिया बेटी के कारण ही उनके परिवार का नाम रोशन हुआ है। यह पल उनके लिए यादगार पलों में से एक है। नागरिकों सहित उनके परिजनों ने भी सौफिया की सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए उनके सफल जीवन के लिए दुआएं की हैं।
चाय पर चला चर्चा का दौर-
कोतवाली के पास ही चाय का स्टाल लगाने वाले जान कुरैशी की भतीजी एवं नौगांव निवासी जान के बड़े भाई एवं सौफिया के पिता ताज मुहम्मद कुरैशी भी फौजी रहे हैं। वह आज भी सेवा निवृत्त होने के बाद पाक से युद्ध की मंशा रखते हैं। उन्होंने चैनलों पर स्पष्ट कहा है कि वह अभी भी देश सेवा के लिए तैयार हैं। उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है। वहीं जान भाई और उनका परिवार भी गर्व महसूश कर रहा है। सौफिया का सारा परिवार और रिश्तेदार भी चाहते हैं कि पाकिस्तान को सबक सिखाया जाना चाहिए। यहां टी स्टाल पर आने वाले लोगों में भी चाय की चुश्कियों के साथ ही एक ही चर्चा हो रही है। सौफिया की बहादुरी एवं उनकी देश भक्ति को लेकर लोगों में खुशी देखी जा रही है।
तीस साल पहले आए थे जान भाई-
जान मुहम्मद नौगांव से यहां तीस साल पहले आए थे। उनकी शादी टीकमगढ़ होने से वह यहां अपनी ससुराल में ही आकर रहने लगे थे। उनकी पत्नी नाम श्रीमती नूर जहां है। जान मुहम्मद की तीन बेटियां और तीन बेटे हैं। बेटियों के विवाह हो चुके हैं, जो अपनी ससुराल में हैं। बेटे शान मुहम्मद, जावेद मुहम्मद एवं खालिद मुहम्मद भी यहां अपने पिता का हाथ बटाते हैं। जान भाई की खुशी का ठिकाना नहीं है। वह और उनके परिवार के सदस्य अपनी सौफिया बेटी की कामयाबी और पाकिस्तान के मटिया मेट होने का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पहले वह यहां आने पर खाई मुहल्ला में रहा करते थे। इसके बाद वह इन दिनों पठला मुहल्ला में निवास करते आ रहे हैं।
बुंदेली जांबाज़ बेटी से कह रहा देश- बेटी शाबाश’
कलम, कला और कृपाण की पावन धरा बुंदेलखंड पर जन्मी बेटी ने बुंदेलखंड ही नहीं सारे देश का नाम गर्व से ऊंचा कर दिया। महारानी लक्ष्मी बाई की वीर भूमि बुंदेलखंड पर आतंकी दरिंदों को धूल चटाने के लिए एक और शेरनी ने अपने जौहर दिखा दिये हैं। यहां बता दें कि भारतीय सेना की तरफ से प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी का सीधा जुड़ाव बुंदेलखंड की धरती से है! उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा ;कक्षा 1 से 5द्ध नौगांव ;छतरपुरद्ध के जीण्टीण्सीण् स्कूल में पूरी की। उनके पिता भी भारतीय सेना में मेजर के पद से सेवानिवृत्त हुए हैंए यानी देशभक्ति और वीरता उनके खून में बसी है। आज उनका परिवार भले ही बड़ौदा में रहता है,्र यहां नगर में इन दिनों लोग बड़े गर्व से बताते हैं कि वह जान मुहम्मद की भतीजी एवं शान मुहम्मद की चचेरी बहिन है। वहीं लोग कह रहे हैं कि वह नौगांव निवासी स्वर्गीय बबलू सुलेमान और बंटी सुलेमान के मामा की बेटी हैं। बुंदेलखंड की मिट्टी हमेशा से वीरों की जननी रही है, यहाँ की गाथाओं में रानी लक्ष्मीबाई की तलवार से लेकर आम जवानों की कुर्बानी तक, हर कदम पर शौर्य लिखा है। अब इस परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं कर्नल सोफिया कुरैशी, जिनकी बहादुरी ने पूरे देश में बुंदेलखंड का नाम रोशन किया है। भारत माता के इन जांबाज़ सपूतों और बेटियों को सारा देश सलाम करता है।








