टीकमगढ़। कलियुग के केवल हरिगुन गाहा…। कलियुग में प्रभु नाम सुमरन की महिमा अपार है। राम नाम का सुमरन करने मात्र से ही मनुष्य भव सागर से पार हो जाता है। अन्य युगों में जो पुण्य हजारों की साल की तपस्या से भी प्राप्त नहीं होता था, वह पुण्य केवल कलिकाल में प्रभु नाम जपने से ही हो जाता है। प्रभु नाम की महिमा अपार है। सभी को प्रभु नाम सुमरन जरूर करना चाहिए। यह विचार संत श्री सीताराम दास जी ने व्यास गद्दी से व्यक्त किए। कथा के पहले दिन उन्होंने लोगों को श्रीराम कथा एवं प्रभु राम नाम के महत्व के बारे में विस्तार से बताया। बताया गया है कि शहर के प्राचीन नजर बाग मंदिर में नौ दिवसीय श्रीराम कथा का आयोजन शुक्रवार से शुरू हुआ, कथा के पहले दिन भव्य कलश यात्रा निकाली गई। कथा के पहले दिन महेंद्र सागर तालाब स्थित प्रतापेश्वर मंदिर से कलश यात्रा का शुभारंभ हुआ। इस दौरान कथा यजमान पंडित मनोज अवस्थी सपत्नी श्रीराम कथा लिए साथ चले। इस अवसर पर अवस्थी परिवार सहित अन्य श्रद्धालु भी शामिल हुए। भजन मंडली के साथ ही महिलाएं भी भजन कीर्तन करते हुए निकली। इस यात्रा में कथा वाचक बुंदेलखंड पीठाधीश्वर महंत सीताराम दास महाराज, कई साधु-संत बग्गी पर सवार हुए। लोगों ने जगह-जगह पुष्प वर्षा एवं आरती की। महिलाओं ने सिर पर कलश धारण किए और रास्ते में मंगल गीत गाए। कलश यात्रा ताल दरवाजा, पपौरा चौराहा, स्टेट बैंक चौराहा से होते हुए दोपहर 4:30 बजे नजर बाग मंदिर पहुंची, जहां विधि-विधान से कलश स्थापना की गई और कथा का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने राम कथा सुनकर धर्म लाभ लिया।
कायस्थ बंधुओं ने पुष्प वर्षा-
भगवान चित्रगुप्त मंदिर पर ट्रस्ट के नव नियुक्त अध्यक्ष प्रमोद खरे ढक्कू भैया सहित अनेक कायस्थ बंधुओं ने कलश यात्रा का भव्य स्वागत करते हुए संतश्री का पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप खरे, संदीप खरे, विकास खरे, सुभाष खरे, अजय खरे, कैलाश खरे, बृजेश खरे, रविन्द्र खरे, किरण खरे, अरूण खरे, सतीश खरे, गिरीश खरे सहित अन्य कायस्थ बंधु शामिल रहे। बताया गया है कि कलश यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं और श्रद्धालु शामिल हुए।
1 नवंबर तक बहेगी ज्ञान गंगा-
श्रीराम कथा के मुख्य यजमान मनोज अवस्थी ने बताया कि यह आयोजन श्री राम भक्त मंडल की ओर से किया जा रहा है। आयोजन समिति के सदस्य रमेश द्विवेदी के अनुसार कथा 24 अक्टूबर से आरंभ होकर 1 नवंबर तक चलेगी। प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से बुंदेलखंड पीठाधीश्वर महंत सीताराम दास महाराज कथा का वाचन करेंगे। श्री अवस्थी ने श्रद्धालुओं से राम कथा आयोजन में शामिल होकर धर्मलाभ लेने की अपील की है। कथा के समापन पर कन्या भोज और भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
बताई प्रभु राम नाम की महिमा-
पहले दिन की कथा में महाराज ने राम नाम की महिमा बताई। उन्होंने बताया कि कई कथावाचक मानते हैं कि मूल राम कथा की रचना भगवान शंकर ने की थी, जो गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से हम तक पहुंची है। महाराज ने कहा कि राम नाम अविनाशी है। दुनिया में सब कुछ बदल सकता है, लेकिन राम नाम सदा बना रहेगा। इसकी महिमा कभी कम नहीं होगी, बल्कि दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जाएगी। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम स्वयं कह गए हैं कि राम से बड़ा राम का नाम है। जीवन का आधार ही राम नाम है। यह सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि सबसे बड़ा मंत्र है। सदाशिव भोले शंकर भी हर प्रहर इसी नाम का जाप करते रहते हैं।









