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एक शाम बुंदेली कविता के नाम बुंदेली काव्य गोष्ठी-जुनरी न बईयो राजा, नदिया किनारे….

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टीकमगढ़। जुनरी न बईयो राजा, नदिया किनारे…., जिनसें मिली अंखियां बेई न मिले… और राजा जनक रची जेबनारी जू… सहित अनेक लोकशैली वद्ध गीतों को सुनकर श्रोता मंत्र मुग्ध हो उठे। आकाशवाणी कलाकार बलराम यादव की शानदार प्रस्तुति ने कार्यक्रम को और भी रोचक बना दिया। श्री यादव बुंदेलखंड के जाने माने कलाकारों में से एक हैं, जिनके लोकगीतों की क्षेत्र में धूम मची हुई है। बताया गया है कि बीते रोज खरगापुर जिला टीकमगढ़ के पुराने बाजार स्थित कुंजबिहारी मंदिर में बुंदेली संस्कृति के बहुआयामी प्रचार-प्रसार में संलग्न गर्भनाल न्यास के बैनर तले आयोजित एक शाम बुंदेली कविता के नाम संगीतमय कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। उल्लेखनीय है कि कार्यक्रम की निरंतरता का यह छठवां वर्ष था। खरगापुर निवासी समाजसेवी कालिका प्रसाद यादव को सनातन धर्म, बुंदेली परम्परा एवं समाजहित के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए गर्भनाल न्यास द्वारा द्वितीय सामाजिक सरोकार सम्मान प्रदान किया गया। क्षेत्र में उनकी पहचान परम्परागत बुंदेली संस्कृति के प्रचारक की रही है। वे बुंदेली के गायक एवं बांसुरी वादक भी हैं। पं कौशल किशोर दास संस्कृत पाठशाला पुनस्र्थापना अभियान में उन्होंने सक्रिय योगदान दिया है। इस अवसर पर गर्भनाल न्यास द्वारा प्रकाशित बुंदेली के प्रख्यात लोकगीत लेखक भजनलाल लोधी के बुंदेली काव्य संग्रह जिया-हिया की बातें का विमोचन विशिष्ट अतिथि एवं उपस्थित बुंदेली कवियों द्वारा किया गया। न्यास ने बुंदेली भाषा के बहुआयामी विकास और संरक्षण के कामों को गति देने की कड़ी में यह द्वितीय बुंदेली काव्य संग्रह प्रकाशित किया है। आगामी वर्षों में अन्य बुंदेली कवियों के काव्य संकलन प्रकाशित किये जायेंगे। उल्लेखनीय है कि बुंदेली कविता और साहित्य में इतना बिखराब है कि उसे समग्रता से संकलित किये जाने की महती आवश्यकता है। इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिये न्यास ने कुंडेश्वर में पं बनारसीदास चतुर्वेदी को स्मरण करते हुए बुंदेली कवि सम्मेलन का जो सिलसिला प्रारंभ किया था, श्री कुंजबिहारी मंदिर खरगापुर में प्रतिवर्ष बुंदेली कवि गोष्ठी आयोजित कर यह निरंतर जारी है। बताया गया है कि काव्य गोष्ठी में बुंदेली कवि सर्वश्री डॉ मैथिली शरण श्रीवास्तव पृथ्वीपुर, आशाराम वर्मा नादान पृथ्वीपुर, प्रदीप खरे मंजुल टीकमगढ़, जयहिंद सिंह गुड़ा एवं भजन लाल लोधी फुटेर ने अपनी बुंदेली की कविताएँ सुनाईं। बुंदेली के प्रख्यात लोक गायक बलराम यादव ने बुंदेली के अनेक लोकगीत सुनाकर श्रोताओं को आनंदित किया। कार्तिक गीत जिनसें मिली अंखियां बेई न मिले सुनकर महिलाएं एवं पुरूष झूम उठे। अंत में रामानुज शर्मा ने आभार माना। आयोजन दोपहर 2 बजे प्रारंभ हुआ और देर शाम तक चलता रहा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रोताओं ने बुंदेली कविताओं का आनंद उठाया। आयोजन का लाइव प्रसारण यूट्यूब चैनल पर किया गया।

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