
किसानों को बताये प्राकृतिक खेती करने के तरीके
छतरपुर । किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा कृषि विस्तार सुधार कार्यक्रम के अंतर्गत स्थापित प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण केंद्र पर प्रगतिशील किसान एवं मास्टर ट्रेनर चितरंजन चौरसिया ने उपस्थित किसानों को प्राकृतिक खेती के संबंध में जानकारी दी। इस अवसर पर उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती किसान के पास उपलब्ध गाय के गोबर, गोमूत्र, बेसन, गुड़ तथा उपलब्ध संसाधनों से की जाती है जिससे खेती की लागत कम होती है तथा मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ती है इसलिए प्राकृतिक खेती हर प्रकार से किसानों के लिए लाभकारी है।
प्रगतिशील किसान मास्टर ट्रेनर चितरंजन चौरसिया ने इस अवसर पर किसानों को जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत, खाद, ब्रह्मास्त्र एवं अन्य कीटनाशक बनाने की जानकारी दी एवं किसानों को खाद बनाने व उनका फसलों में प्रयोग की विधि भी बताई। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरक और कीटनाशक जहां मिट्टी की उर्वरा शक्ति को कम करते हैं। वहीं इनके अंधाधुंध प्रयोग से अनेक प्रकार की बीमारियां मनुष्य और पशुओं में होती हैं इसलिए हमें जैविक खाद का प्रयोग सब्जी व फसल उत्पादन में करना चाहिए क्योंकि मिट्टी के अंदर पर्याप्त पोषक तत्व पाए जाते हैं जब हम इनमें जीवामृत का प्रयोग करते हैं तब असंख्य जीवाणु उत्पन्न होते हैं जिससे मिट्टी की उपजाऊ क्षमता में वृद्धि होती है एवं अच्छा फसल उत्पादन प्राप्त होता है। इस अवसर पर किसानों ने प्राकृतिक खाद से उगाई जा रही आलू, टमाटर एवं मिर्च की फसलें भी देखी। प्राकृतिक खेती में उपयोग किए जाने वाला गाय का गोबर, गोमूत्र किसानों को बिना किसी खर्च के प्राप्त हो जाते हैं साथ ही गुड़, बेसन एवं अन्य सामग्री भी नाम मात्र के खर्च पर प्राप्त होती है इसलिए हमें कम लागत में पौष्टिक और अच्छा उत्पादन प्राप्त होता है। इस अवसर पर किसान मुन्नालाल रैकवार, उपेंद्र रैकवार, प्यारेलाल प्रजापति, वृंदावन अनुरागी, प्रभंजन चौरसिया सहित अन्य किसान उपस्थित रहे। सभी किसानों ने केंचुआ पालन एवं खाद उत्पादन इकाई का भी भ्रमण किया।








