पलेरा। नंबर वन के चक्कर में यहां कई विभागों ने अपने करतब दिखा डाले हैं। शासन स्तर पर वाहवाही लूटने के लिए यहां की अफसरशाही किसी भी हद तक जा सकती है। प्रमाण पत्रों को पाने एवं आला अधिकारियों की नजरों में आने के लिए जिले में फर्जीै कारनामों को अंजाम देने में भी किसी प्रकार की कमीं नहीं छोड़ी जा रही है। जिले में जिस तरह से कागजी घोड़े दौड़ाकर आंकड़ों की बाजीगरी दिखाई जा रही है, उससे आवाम भी भौचक्का रह गया है। आश्चर्य की बात तो यह है कि यह सब जिले के आला अधिकारियों के रहते हो रहा है और किसी प्रकार की सख्ती या कार्रवाई की उम्मीद नहीं की जा रही है। ऐसा ही एक मामला इन दिनों नगर परिषद पलेरा का चर्चाओं में बना हुआ है। कहा जा रहा है कि नगर परिषद पलेरा द्वारा स्वच्छता सर्वेक्षण में बेहतर अंक हासिल करने के लिए जो करतब दिखाए हैं, वह इन दिनों जांच का विषय बनें हुए हैं। नगर परिषद पलेरा में किए जा रहे कार्यों में बड़े पैमाने पर धांधली और मनमानी के चलते लोगों ने अधिकारियों एवं परिषद के जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों पर अब सवाल उठाना शुरू कर दिया है। नगर के लोगों का आरोप है कि स्वच्छता सर्वेक्षण के नाम पर केवल दिखावे के साथ ही औपचारिकता निभाई जा रही है, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति इससे ठीक उल्टी दिखाई दे रही है। जानकारी के अनुसार सर्वेक्षण में अच्छे नंबर प्राप्त करने के उद्देश्य से एक एनजीओ के माध्यम से कथित तौर पर फर्जी तरीके से ओटीपी के जरिए सर्वे फॉर्म भरवाए गए। इस मामले को लेकर नगरवासियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है और लोग इसकी निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर नगर में हरित वातावरण का संदेश देने के लिए लगाए गए पौधों को कुछ ही समय बाद हटाए जाने का मामला भी सामने आया है। स्थानीय लोगों ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया, जिसके बाद नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे हैं। नगरवासियों का कहना है कि यदि नगर को वास्तव में स्वच्छ और हरित बनाना है, तो ईमानदारी और स्थायी रूप से कार्य किए जाएं, न कि केवल सर्वेक्षण और वाहवाही पाने के लिए दिखावटी व्यवस्थाएं बनाई जाएं। अब नगर की जनता यह सवाल उठा रही है कि क्या जनता की आंखों में धूल झोंककर सिर्फ नंबर वन बनने और प्रशंसा पाने का प्रयास उचित है, फिलहाल यह मामला नगर में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि केवल फोटो सेसन और फर्जी पौधारोपण करने से ही क्या लोगों को जागरूक किया जा रहा है। शासन की राशि का जिस तरह से दुरूपयोग किया जा रहा है और जनता की मूलभूत समस्याओं की अनदेखी की जा रही है, उससे नंबर वन तो दूर नंबर मिलना ही दूभर नजर आने लगा है। हालांकि प्रशासन वायरल होते वीडियो एवं खबरों के सुर्खियों में आने के बाद भी कुछ करेगा, इसकी उम्मीद आम लोगों में भी कम ही नजर आ रही है। कहा जा रहा है कि यह कोई अनियमितताओं एवं धांधली को लेकर पलेरा क्षेत्र का पहला मामला नहीं है। इसके पहले भी कई अनियमिताओं एवं गड़बडिय़ों को लेकर आरोप लगाए गए हैं, लेकिन यहां अब तक किसी प्रकार की कार्रवाई होती नजर नहीं आई है। अब देखना है कि नगर पालिका पर उठे सवाल के बाद प्रशासन क्या कार्रवाई करता है।










