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टीकमगढ़ में कंधे पर बस्ते..किटकिटाते दांत…कपकपाता शरीर और रगड़ते हाथ…जाएं तो जाएं कैसे इस कढक़ढ़ाती सर्दी में बच्चे स्कूल, हाल बेहाल

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टीकमगढ़। कंघे पर बस्ते..किटकिटाते दांत…कपकपाता शरीर और रगड़ते हाथ…यह नजारा है इन दिनों स्कूल जाते बच्चों का। गांवों में स्कूल एक बार फिर सर्दी के बावजूद खुल गए हैं। शिक्षक और बच्चों ने स्कूल खुलते ही पाठशाला की ओर अपना रूख कर लिया है। सर्द हवाओं एवं शीत लहरों ने हाड़ कपाने वाली सर्दी फैला रखी है। प्रशासन द्वारा घोषित छुट्टियों को बढ़ाने पर जहां गांववासियों ने जोर दिया है, वहीं बच्चों की दशा पर तरस खाकर कुछ स्कूलों में आग का इंतजाम कर बच्चों को पढ़ाया जाने लगा है। कहा जा रहा है कि ऐसे में लाइट की कटौति के कारण और भी मुश्किल बनी रही। हाल ही में एक वायरल वीडियों एवं शिक्षक के परिश्रम को देखकर लोगों ने शिक्षकों की सराहना की है। साथ ही इसी प्रकार के इंतजाम अन्य स्कूलों में किए जाने पर भी जोर दिया है। यहां बता दें कि शारीरिक कमजोरी यहां के शिक्षक रवीन्द्र रावत के कार्य में कभी भी आड़े नहीं आई। वह अपना कार्य जहां पूरी निष्ठा और ईमानदारी से करते आ रहे हैं। वहीं दूसरी ओर समाजसेवा करने एवं धार्मिक कार्यों में भी वह कभी पीछे नहीं रहते हैं। स्कूल में आने वाले बच्चों का उत्साह ही बताता है कि वह अपने स्कूल में कितने प्रसन्न हैं। बताया गया है कि कड़ाके की सर्दी ने लोगों को हिलाकर रख दिया है। ऐसे में स्कूलों का खुलना और बच्चों को कपकपाते हुए स्कूल जाना अभिभावकों के लिए चिंता का विषय बा हुआ है। बताया गया है कि इस कड़ाके की ठंड के बीच बुधवार से नर्सरी से आठवीं तक के स्कूल एक बार फिर से खोल दिए गए हैं। कानों पर टोपा, गर्म कपड़े और हाथों में दास्तानें होने के बाद भी सर्दी शिक्षकों का पीछा नहीं छोड़ रही है। शीतलहर के कारण क्लास रूम में भी बच्चे ठंड से बेहाल दिख रहे हैं। उन्हें ठंड से बचाने के लिए शासकीय प्राइमरी स्कूल शिलामती खेरा के शिक्षकों ने हरसंभव प्रयास शुरू कर दिए हैं। यहां का नजारा देख अभिभावक एवं बच्चे अपने शिक्षक एवं शिक्षकाओं की सराहना किए बगैर नहीं रह सके हैं। यहां बता दें कि सलामती खेरा का यह स्कूल आईडल स्कूलों सुमार है। यहां कि शिक्षक एवं शिक्षकाओं की मेहनत कुछ अलग ही रंग बिखेरती रही है। यहां स्कूल में बच्चों की उपस्थिति अधिकांश शत-प्रतिशत ही रहती है। बच्चों की शिक्षा पर जिस कदर ध्यान दिया जाता है, उतना ही ध्यान यहां बच्चों के स्वास्थ्य एवं खेलों पर दिया जाता रहा है। यह सारा श्रेय यहां के शिक्षक रविन्द्र रावत के अलावा शिक्षिका कल्पना शर्मा को जाता है। यहां के प्रधानाध्यापक राजेन्द्र तिवारी के कुशल निर्देशन में यह विद्यालय लगातार उन्नति करता नजर आ रहा है। हालांकि इन दिनों एचएम श्री तिवारी बीएलओ का भी प्रभार सम्हाले हुए हैं, जिस कारण प्रभार रविन्द्र रावत देख रहे हैं। यहां श्री रावत ने बच्चों को ठंड से बचाने के लिए क्लास रूम में आग का इंतजाम किया और फिर बच्चों की पढ़ाई शुरू हुई। आगी का इंतजाम होते ही बच्चों को सर्दी से राहत मिली और उन्होंने पढ़ाई की। स्कूलों के समय में नहीं हुआ बदलाव-
बताया गया है कि शीत लहरों के बढ़ते प्रकोप के बाद भी स्कूल अपने पूर्व निर्धारित समय पर ही खुल रहे हैं। जिले में पिछले चार दिनों से शीत लहर का भारी प्रकोप बना हुआ है। दिन का तापमान 17 से 20 डिग्री सेल्सियस और रात का तापमान 6 से 7 डिग्री सेल्सियस के बीच रिकार्ड किया जा रहा है। इस भीषण ठंड के बावजूद सुबह की शिफ्ट में लगने वाले अधिकांश स्कूलों के समय में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिस कारण बच्चों को सर्दी का सामना करना पड़ रहा है।
बच्चों की सुरक्षा का निभाया दायित्व-
शासकीय प्राइमरी स्कूल शिलामती खेरा के शिक्षक रविंद्र रावत जहां शिक्षण कार्य को बखूबी अंजाम दे रहे हैं, वहीं बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी को वह बखूबी निभा रहे हैं। यहां बता दें कि सलामति खेरा ऐसा स्कूल है, जहां बच्चों को हमेशा स्वादिष्ट भोजन दिया जाता है। कई बार शिक्षक यहां कन्याओं एवं बच्चों को भोज भी कराते रहते हैं। बच्चों का कहना है कि वह स्कूल की व्यवस्थाओं एवं शिक्षकों के कार्य से खुश है। सभी मन लगाकर पढ़ाई करते हैं। बताया कि बच्चों को ठंड से परेशान देखकर उन्होंने क्लास रूम में आग जलाई और बच्चों को शीत लहर से राहत दिलाई। आग जलाने के बाद बच्चों की पढ़ाई शुरू कराई गई। शिक्षिका कल्पना शर्मा भी ऐसी सर्दी में यहां बच्चों को पढ़ाते नजर आईं। वह भी बच्चों के लिए हमेशा कुछ न कुछ करती रहती हैं। शिक्षा के साथ साथ बच्चों को संस्कार एवं सभ्यता सिखाने में भी वह कभी पीछे नहीं हैं।
साहब…स्कूल 10 बजे के हो जाते
सलामती खेरा निवासी अभिभावकों सहित कुछ अन्य स्कूलों के बच्चों एवं उनके अभिभावकों का कहना है कि वैसे तो अभी बच्चों को स्कूल भेजना सरल नहीं है, फिर भी कम से कम इन दिनों स्कूलों का समय तो बदला ही जा सकता है। कड़ाके की इस सर्दी को देखते हुए कलेक्टर को चाहिए कि वह कुछ दिनों का अवकाश और घोषित कर दें । यदि संभव न हो, तो वह कम से कम स्कूलों का समय तो बदल ही दें। गांववासियों का कहना है कि उन्होंने 5 और 6 जनवरी को नर्सरी से कक्षा आठवीं तक के स्कूलों में छुट्टी घोषित किया था। छुट्टी खत्म होने के बाद बुधवार से स्कूल सामान्य समय पर शुरू हो गए। मौसम के मिजाज फिलहाल सुधरते नजर नहीं आ रहे हैं। मौसम विभाग के अनुसार भी अगले तीन से चार दिनों तक शीत लहर का प्रकोप जारी रहने की संभावना है। स्थानीय लोगों ने ठंड को देखते हुए स्कूलों का समय सुबह 10 बजे के बाद करने की जरूरत महशूस की है।
फीड बैक ले लिया गया है…चौहान
जिला शिक्षा अधिकारी एचएस चौहान कहते हैं कि सर्दी से अभी भी बच्चे परेशान हैं और गांवों में भी लोगों से चर्चा की गई है। सर्दी के बिगड़ते मौसम में बच्चे और अभिभावक क्या चाहते हैं, और आने वाले दिनों में अवकाश जरूरी है या नहीं…सारी जानकारी से साहब को अवगत करा दिया जाएगा। इस संबन्ध में जल्दी ही निर्णय लिया जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि शीत लहर का प्रकोप देखते हुए कुछ दिनों की छुट्टियां और बढ़ाई जा सकती हैं।

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