छतरपुर। मंगलवार दोपहर लगभग 2 बजे स्वसहायता समूह संगठन विकासखण्ड छतरपुर के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मध्यान्ह भोजन योजना (एमडीएम) में हो रही अनियमितताओं पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराईं।ज्ञापन में समूहों ने आरोप लगाया कि मध्यान्ह भोजन योजना के तहत खाद्यान्न नियमित रूप से उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। एक माह छोड़कर अगले माह खाद्यान्न दिया जाता है, जिससे बच्चों के भोजन की व्यवस्था प्रभावित होती है। कई बार मात्र 40 से 50 प्रतिशत ही खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है, जिसके कारण स्कूलों में बच्चों के साथ-साथ वृद्ध, दिव्यांग एवं जरूरतमंद लोगों को भोजन उपलब्ध कराने में कठिनाई आती है।स्वसहायता समूहों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ शालाओं में शिक्षकों द्वारा समूहों का शोषण किया जा रहा है। ऑनलाइन उपस्थिति अधिक दर्ज की जाती है, लेकिन उसी अनुपात में लाभार्थियों की संख्या नहीं मानी जाती। इसके अलावा रसोइयों की नियुक्ति में भी मनमानी की जा रही है। समूहों ने स्पष्ट किया कि शासन की गाइडलाइन के अनुसार रसोइयों की नियुक्ति का अधिकार स्वसहायता समूहों को है, न कि शाला प्रभारी को। ज्ञापन में सहकारी समितियों एवं सेल्समैन पर भी खाद्यान्न वितरण में कटौती और अनियमितता के आरोप लगाए गए। प्रति बोरी वजन कम देने तथा मशीन खराब होने का बहाना बनाकर खाद्यान्न रोकने की शिकायतें भी सामने आई हैं। समूहों ने ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों को दी जाने वाली खाद्यान्न मात्रा बढ़ाने की मांग की, ताकि बच्चों के पोषण स्तर में सुधार हो सके।स्वसहायता समूहों ने कलेक्टर से मांग की कि खाद्यान्न एवं राशि का भुगतान हर माह समय पर सुनिश्चित किया जाए, जिससे बीपीएल वर्ग की महिलाओं को आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े। ज्ञापन पर लक्ष्मी, रोशनी, गृहलक्ष्मी, महावीर सहित कई स्वसहायता समूहों के प्रतिनिधियों के हस्ताक्षर थे। यह ज्ञापन तहसीलदार रंजना यादव को सौंपा गया।










