टीकमगढ़। परिवहन विभाग की दशा सुधरने का नाम नहीं ले रही है। जिले में परिवहन अफसरों और बस मालिकों की जुगलबंदी ने यात्रियों की जेबों पर डाका डाल रखा है। मनमाना किराया और संचालन यात्रियों की परेशानी का कारण बना हुआ है। आश्चर्य की बात तो यह है कि प्रशासन खुले आम मची लूट की अनदेखी करने में भी गुरेज नहीं कर रहा है। इन दिनों इंदौर, भोपाल एवं जबलपुर आदि इलाकों में पढऩे वाले बच्चों का अपने घर आकर दीवाली मना पाना भी आसान नहीं दिख रहा है। बच्चों के अभिभावकों की मानें तो इन दिनों बस मालिकों द्वारा निर्धारित किराया से दोगुना किराया तक बसूला जा रहा है। इस संबन्ध में मिल रही खबरों में बताया गया है कि टीकमगढ़-इंदौर रूट पर यात्रियों से वसूले जा रहे दोगुने किराये को लेकर लोगों में काफी नाराजगी देखी जा रही है। परिवहन विभाग और प्रशासन इन दिनों धांधली और मनमानी को लेकर मूकदर्शक बना हुआ है। बताया गया है कि दीवाली पर बाहर पढऩे वाले छात्र और अन्य इलाकों में कामकाज करने वाले मजदूरों का घर आना ही कठिन हो रहा है। उनकी परेशानी को लेकर प्रशासन की उदासीनता को लेकर लोगों में असंतोष बना हुआ है। बताया गया है कि दीपावली जैसे बड़े त्योहार पर जहां पूरा देश् उल्लास से तैयारी करने में जुटा है, वहीं टीकमगढ़ से इंदौर एवं इंदौर से टीकमगढ़ मार्ग पर चलने वाली स्लीपर बसें आम जनता की जेब पर खुली डकैती डाल रही हैं। सामान्य दिनों में 700 (सिंगल सीट) और 1400 (डबल सीट) का तय किराया देने वाले यात्रियों से अब 1500 से 2000 रूपए (सिंगल) और 2500 से 3000 रूपए (डबल) तक वसूला जा रहा है। यह मनमानी न केवल कानून का खुला उल्लंघन है, बल्कि आमजन के साथ खुला आर्थिक शोषण भी है। बस ऑपरेटरों में अधिकांश रसूकदार निजी संचालक हैं , जो दीवाली के पहले ही लोगों का दीवाला निकालने में लगे हैं। दीपावली सीजन का हवाला देकर किराया लगभग दोगुना कर दिया है। इंदौर में पढऩे वाले छात्र एवं मजदूर वर्ग एवं नौकरीपेशा लोग जब अपने घर लौटने की उम्मीद लेकर टिकट बुक करने जाते हैं, तो किराया सुनकर ही उनको सर्दी के मौसम में भी पसीना छूटने लगता है। बताया गया है कि उन्हें ऑन लाइन पोर्टलों पर भी यही लूट दिखाई देती है। यानी साजिश व्यवस्थित है और यह शोषण खुलेआम हो रहा है। कहा गया है कि इन तमाम खामियों एवं मनमानी के बाद भी परिवहन अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। लोगों का कहना है कि आखिर जिला प्रशासन और परिवहन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी आखिर कहां है। क्या उन्हें इन कार्यगुजारियों की भनक नहीं लग रही है। शायद वह जान बूझकर इस लूट पर चुप्पी साधे हुए हैं। बसों पर किराया लिखे जाने के निर्देश पूर्व में कई बार दिए गए हैं, लेकिन यहां न तो एक फाटक की बसें चलना बंद हुआ है और न ही बसों पर किराया लिखा गया है। और तो और बस स्टाफ भी बिना बर्दी के धड़ल्ले से चल रहे हैं। यात्रियों ने मांग की है कि प्रशासन तत्काल इस मुद्दे पर सख्त कार्रवाई करे, बस ऑपरेटरों के रूट परमिट की जांच हो और दोषियों पर आर्थिक दंड के साथ-साथ लाइसेंस निलंबन जैसी ठोस कार्यवाही की जाए। अगर अब भी प्रशासन नहीं जागा, बसों का किराया दोगुना बसूल कर इसी प्रकार की लूट मची रहेगी। देखा जा रहा है कि इन दिनों बस मालिकों द्वारा बसूले जा रहे मनमाने किराए की खबरें समाचार पत्रों के साथ ही फेसबुक आदि सोसल साइडों पर भी सुर्खियां बनीं हुई हैं।









