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श्रीराम ने किया ताड़का राक्षसी का वध

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छतरपुर। गल्लामंडी के रामचरित मानस मैदान में चल रही अन्नपूर्णा रामलीला के चौथे दिन माता सीता के जन्म, ताड़का राक्षसी के वध और मुनि आगमन की लीला का मंचन हुआ। लीला से पहले भगवान श्री राम की आरती में पधारे मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ पत्रकार श्याम किशोर अग्रवाल, विशिष्ट अतिथि रिटायर होमगार्ड कमांडेंट करण सिंह, विजय अग्रवाल अलंकार ज्वेलर्स, श्रीमती प्रभा वैध, विनोद सोनी, पत्रकार विनोद मिश्रा, वृंदावन गोस्वामी, पत्रकार मन्नू लाल रैकवार, दुर्गा असाटी, कौशल किशोर घोष, गणेश असाटी सहित समिति के सदस्य मौजूद रहे। महाआरती के उपरांत शहर के समाजसेवियों और पत्रकारों को मां अन्नपूर्णा रामलीला समिति द्वारा सम्मानित किया गया।
चौथे दिन की लीला में दर्शकों ने देखा कि जनकपुरी में एक बार भीषण अकाल पड़ा। सारे मिथिला वासी त्राहि त्राहि कर उठे। यह देख राजा जनक अत्यंत विचलित एवं दुखी हो उठे। उन्होंने अपने कुलगुरु शतानंद मुनि से इसका उपाय पूछा। मुनि बोले हे राजन आप पत्नी सहित भूमि पर हल से जुताई करें। यही सही रहेगा देवराज इंद्र को मनाने का उपाय है। राजा ने अपनी पत्नी सहित हल से जब भूमि को जोता। तभी उनके हल की सीत (किनारी) एक कलश से टकराई। जिसमें से एक कन्या प्रकट हुई जिसका नाम उन्होंने सीता रखा।देवराज इंद्र ने प्रसन्न हो खूब वर्षा की जिससे प्रजा प्रसन्न हो उठी। सभी भक्तगण सीता मैया की जय जयकार करने लगे। इधर अयोध्या में एक दिन कौशिक नंदन मुनि विश्वामित्र पधारे। महाराज दशरथ ने उनका आदर सत्कार कर आगमन का कारण पूछा। मुनि बोले हे दशरथ मैंने एक यज्ञ का संकल्प लिया है लेकिन आए दिन राक्षस गण यज्ञ विघ्न करते हैं मैं चाहता हूं कि आप अपने बेटे राम और लक्ष्मण को मेरे साथ यज्ञ रक्षा हेतु भेजें। महाराज विचलित हो बोले हे मुनिश्रेष्ठ मैंने चौथेपन में इन बच्चों का मुख देखा है आज्ञा हो तो मैं आपके साथ चलूं। तब कुलगुरु वशिष्ठ के समझाने पर राम लक्ष्मण मुनि विश्वामित्र के साथ उनके आश्रम को प्रस्थान करते हैं। राह में ताड़का नामक राक्षसी मुंह फैलाकर मुनि की ओर झपटी तभी प्रभु राम ने अपने तीक्षण बाण से उसका प्राणांत कर दिया। सभी लोग प्रभु राम की जय जयकार करने लगे। आश्रम पहुंचकर मुनि यज्ञ प्रारंभ करते हैं तभी मारीच और सुबाहु नामक राक्षस उनके यज्ञ विध्वंस को पहुंचे। तभी प्रभु राम ने अपने बाण से सुबाहु का प्राणांत कर दिया तथा एक बिना फल वाले बाण से मारीच पर प्रहार किया जिससे वह दक्षिण दिशा में सौ योजन दूर जा गिरा। यह देख विश्वामित्र ने प्रसन्न हो अनेकों अस्त्र शस्त्र प्रभु राम तथा लक्ष्मण को प्रदान किए। यह मंचन देख सभी भक्तगण प्रभु राम लक्ष्मण की जय जयकार करने लगे और भाव विभोर हो उठे।

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