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दस दिनी पर्युषण पर्व संपन्न,आत्म आराधना में लीन रहे श्रावक

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छतरपुर। जैन धर्मावलंबियों के आत्म आराधना के दस दिवसीय पर्युषण पर्व का समापन शनिवार 6 सितंबर को विविध धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ हर्षोल्लास से हो गया। नगर में इस समय आर्यिकाश्री रिजूमति माता जी का ससंघ चातुर्मास चल रहा है। इस कारण पर्यूषण पर्व में उनके मांगलिक प्रवचनों का लाभ श्रद्धालुओं ने लिया।
डॉ सुमति प्रकाश जैन ने बताया कि पर्यूषण पर्व के पश्चात अब 9 सितंबर 25 को नगर में श्रीजी की भव्य पालकी निकलेगी तथा क्षमावाणी पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। जैन धर्मावलंबियों ने आत्म आराधना के पर्वराज पर्युषण पर दस धर्मों का पालन नियम तथा हर्षोल्लास के साथ किया हैं। पर्युषण पर्व के दसवें और अंतिम दिन बड़े जैन मंदिर , हटवारा जैन मंदिर, अतिशय क्षेत्र डेरा पहाड़ी, चेतगिरी जैन मंदिर, ग्रीन एवेन्यू जैन मंदिर आदि में पूजन, अभिषेक और भव्य आरती हुई, इसमें बच्चों और बड़ों ने बढ़ चढ़ कर भाग लिया।
डा. जैन ने बताया कि क्षमावाणी पर्व में विगत में हुई भूलों के लिए एक दूसरे से क्षमा मांगते हैं तथा अपना मनोमालिन्य दूर कर फिर सद्भाव तथा सौहार्दपूर्वक संबंध निर्वहन करते हैं। कल 12 वें तीर्थंकर देवाधिदेव वासुपूज्य भगवान का मोक्ष कल्याणक पर्व, अनंत चतुर्दशी पर्व तथा दसवां पर्व उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म विधि विधान से मनाया गया।
बड़े जैन मंदिर में 5 सितंबर को रात्रि में भक्तांबर आराधना स्पर्धा बड़े भव्य रूप में संपन्न हुई, जिसमें 70 जोडिय़ों ने मोहक आराधना की। इस कार्यक्रम में अतिथि के रूप में तहसीलदार आलोक जैन, ड्रग इंस्पेक्टर अजित जैन, सहायक जीएसटी अधिकारी पूजा जैन एवं प्रो सुमति प्रकाश जैन उपस्थित रहे, जिन्होंने सभी प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया। वही डेरापहाड़ी में चेलना महिला मंडल द्वारा लाड़ू सजाओ प्रतियोगिता हुई, जिसमें प्रतिभागियों ने मनमोहक ढंग से लाड़ू बनाए और सजाए थे। रात्रि में यहां हुए सरस कवि सम्मेलन का आनंद श्रोताओं ने उठाया।
प्रो. जैन के अनुसार उत्तम ब्रह्मचर्य का अर्थ है निजात्मा और चर्य का अर्थ है आचरण करना या लीन होना। अत: ब्रह्मचर्य से तात्पर्य निज आत्मा में लीन होना। उत्तम ब्रह्मचर्य मन लावे, नरसुर सहित मुक्ति फल पावे। ब्रह्म के मायने हैं ऐसी आत्मलीनता जिसमे बाहर के पदार्थों के प्रति कोई आसक्ति ना रह जाए।
पंडित उमेश शास्त्री, सांगानेर ने डेरापहाड़ी जैन मंदिर में अपने प्रवचन में कहा कि जब हम आत्म स्वभाव से परिचित होते है, विषयों के प्रति अनासक्त में होते है और देहासक्ति से ऊपर उठ कर आत्मानुराग से भर जाते है तो यही सही मायने में ब्रह्मचर्य हैं। जैन समाज के अध्यक्ष अरुण जैन अन्नू एवं समस्त कार्यकारिणी ने पर्यूषण पर्व पर हुए सभी कार्यक्रमों में सहभागिता करने वालों और सहयोगियों देने वाले बंधुओं का हार्दिक आभार व्यक्त किया है। पर्यूषण पर्व के अंतिम दिन अनंत चौदस को छतरपुर के मेला ग्राउंड स्थित अजितनाथ जिनालय सहित सभी मंदिरों श्री जी का महामस्तकाभिषेक और पूजन श्रद्धालुओं द्वारा पूरी धार्मिक प्रभावना के साथ किया गया।

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