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मलेरिया पर काबू, मौसमी बीमारियों का प्रकोप बरकरार

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छतरपुर। मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों जैसे मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया ने हर साल छतरपुर जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था को चुनौती दी है, लेकिन इस वर्ष मलेरिया के मामलों में कमी देखी गई है। जिला स्वास्थ्य विभाग की सतर्कता, नियमित जांच और दवा छिड़काव के प्रयासों ने इस जानलेवा बीमारी को काबू में रखा है। हालांकि, मौसमी बीमारियों का बोझ इस वर्ष भी जिला अस्पताल पर बढ़ रहा है। मरीजों की भारी भीड़ के कारण संसाधनों पर दबाव है। इसी बीच डेंगू और चिकनगुनिया के भी करीब आधा दर्जन मामले सामने आए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
जूनियर मलेरिया इंस्पेक्टर दिनेश कुमार पटैरिया ने बताया कि इस साल जनवारी से अब तक छतरपुर जिले में मलेरिया का एक भी मामला सामने नहीं आया, जो कि एक बड़ी उपलब्धि है। पिछले साल इस अवधि तक चार मरीजों में मलेरिया की पुष्टि हुई थी। जिले में इस साल 1,47,731 जांचें की गईं, जिनमें से कोई भी मलेरिया पॉजिटिव नहीं पाया गया। जिला अस्पताल में 394 मरीजों की डेंगू और चिकनगुनिया की जांच की गई, जिसमें दोनों बीमारियों के तीन-तीन मरीज मिले। सभी मामलों को एकीकृत स्वास्थ्य सूचना मंच (आईएचआईपी) पर अपलोड किया गया है, चाहे जांच सरकारी अस्पताल में हुई हो या निजी।
ग्रामीण अंचलों में रैपिड टेस्ट कार्ड से हो रही जांच
श्री पटैरिया ने बताया कि जिले में स्थिति नियंत्रण में है, और लगातार दवा छिड़काव के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में आशा कार्यकर्ताओं द्वारा रैपिड टेस्ट कार्ड से जांच की जा रही है। मलेरिया के लक्षण दिखने पर मरीजों को तुरंत जिला अस्पताल रेफर किया जाता है।
मच्छरजनित बीमारियों से बचने के लिए करें यह उपाय
अस्पताल प्रबंधन ने लोगों से अपील की है कि वे अपने घरों के आसपास जमा पानी में जला हुआ तेल डालें, मच्छरदानी का उपयोग करें, और सप्ताह में एक बार कूलर, पानी की टंकी और फ्रिज की पीछे की टंकी को साफ करें। यह छोटे-छोटे कदम मच्छरों के प्रजनन को रोकने में कारगर हैं।
जिला अस्पताल की ओपीडी में उमड़ रही मरीजों की भीड़
छतरपुर जिला अस्पताल की ओपीडी में मौसमी बीमारियों से ग्रस्त मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हर दिन लगभग 1500 से 2000 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, जो अस्पताल की क्षमता से कहीं अधिक है। बेड की कमी के कारण कई मरीजों को हॉल में लेटकर इलाज कराना पड़ रहा है। मौसमी बुखार, सर्दी-जुकाम और अन्य बीमारियों के मरीजों की भीड़ ने स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ा दिया है।

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