जिले के गौरिहार थाना क्षेत्र में करीब 6 माह पूर्व ट्रैक्टर की टक्कर से गंभीर रूप से घायल हुए एक युवक को न केवल शारीरिक पीड़ा झेलनी पड़ रही है, बल्कि पुलिस की निष्क्रियता ने भी उसका दुख बढ़ा दिया है। शुक्रवार को न्याय की आस में युवक अपने पैर की टूटी हड्डी हाथ में लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा, जहां उसने टक्कर मारने वाले ट्रैक्टर चालक के खिलाफ कार्रवाई की मांग रखी।
ग्राम कल्याणपुर निवासी रामकेश पाल ने बताया कि 12 फरवरी 2025 को ग्राम मुड़ेरी में बृजेन्द्र त्रिवेदी निवासी मढ़ा ने अपने से ट्रैक्टर उसकी बाइक को टक्कर मार दी थी। इस हादसे में उनके पैर में गंभीर चोट आई और हड्डी टूट गई। रामकेश के मुताबिकक इलाज पर अब तक सात से आठ लाख रुपये खर्च हो चुके हैं और उपचार अभी भी जारी है। रामकेश ने लवकुशनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी लेकिन पुलिस ने न तो ट्रैक्टर मालिक बृजेन्द्र त्रिवेदी के खिलाफ कोई कार्रवाई की और न ही वाहन को जब्त किया। रामकेश ने आरोप लगाया कि पुलिस ने प्रकरण में बृजेन्द्र का नाम तक दर्ज नहीं किया है। न्याय की उम्मीद खो चुके रामकेश ने अपने पैर की टूटी हड्डी दिखाते हुए पुलिस अधीक्षक से ट्रैक्टर मालिक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
डॉ. मनोज चौधरी ने दो बच्चों के गले से निकाले सिक्के
वहीं जिला अस्पताल में डॉ. मनोज चौधरी ने अपनी विशेषज्ञता से एक बार फिर दो बच्चों की जान बचाई, जिन्होंने खेलते समय सिक्के निगल लिए थे। बताया गया है कि उत्तरप्रदेश के महोबा गांधीनगर निवासी 4 वर्षीय आरुषि पुत्री सुरेंद्र शर्मा ने शुक्रवार की सुबह करीब 11 बजे 5 रुपये का सिक्का निगल लिया। परिजन उसे स्थानीय अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने असमर्थता जताई। इसके बाद वे छतरपुर जिला अस्पताल पहुंचे, जहां डॉ. चौधरी ने महज 5 मिनट में कैथेटर की मदद से सिक्का बाहर निकाल दिया। इसी तरह, पन्ना के अजयगढ़ निवासी 10 वर्षीय अंशुल पुत्र कल्लू पटेल ने भी 10 रुपये का सिक्का निगल लिया था, जो उसकी आहार नली में फंस गया। पन्ना के डॉक्टरों ने अंशुल को छतरपुर रेफर किया, जहां डॉ. चौधरी ने सिक्का बाहर निकाला। उल्लेखनीय है कि डॉ. चौधरी अब तक करीब 1500 से अधिक बच्चों के गले से सिक्के निकाल चुके हैं। उन्होंने अ?भिभावकों से बच्चों को सिक्के या ठोस वस्तुएं न देने की अपील की है, ताकि ऐसी घटनाएं रोकी जा सकें।









