
जिस घर में तुलसी की पूजा होगी वह घर धनधान्य से सदैव भरा रहेगा- वेदांत महाराज
महाराजपुर। कमल तलैया प्रांगण में चल रही शिव महापुराण की कथा के आठवें दिन भस्मासुर एवं गणेश जन्म की कथा आचार्य वेदांत महाराज के द्वारा सुनाई गई शिव महापुराण के अगले प्रसंग मैं कथा व्यास ने बताया कि जो भी सच्चे मन से महादेव की भक्ति करता है उसके सभी दुखों का अंत निश्चित है एवं माता-पिता और गुरु की सेवा करने वाले का कभी बुरा नहीं हो सकता।आचार्य वेदांत महाराज शिव महापुराण की कथा में बताते हैं कि भगवान महादेव अपने नाम की तरह ही भोले भाले हैं वह अपने भक्तों को कुछ भी देने से मन नहीं करते ऐसी ही एक कथा में भगवान महादेव कैलाश पर्वत पर बड़ी ही प्रसन्न मुद्रा के साथ बैठे हुए थे तभी उन्होंने नंदी से भस्म लाने के लिए कहा तब नंदी जाकर एक पत्र में ताजा भस्म ले आया भस्म को लगाते ही उसके एक कण से रक्षस की उत्पत्ति हुई जिसे देखकर भगवान महादेव प्रसन्न हुए और उसका नाम भस्म से जन्म होने के कारण भस्मासुर रख दिया तभी उसके विचार अन्य गणों की तरह न होकर एक असुर की तरह थे क्योंकि जो भस्म लाई गई थी वह एक असुर की थी तभी वह भस्मासुर जाकर महादेव की घोर तपस्या में लीन हो गया और उसकी इस कठिन तपस्या को देखकर महादेव उस पर अति प्रसन्न हुए और उसे वर मांगने को कहा तभी भस्मासुर ने कहा कि मुझे अमृता का वरदान दे दो तब महादेव ने कहा कि इस संसार में जो भी आया है उसका जाना भी निश्चित है इसीलिए तुम्हें अमरता का वरदान नहीं दे सकता हूं तभी महादेव ने उसको वरदान दिया कि जिसके सर पर भी वह अपना हाथ रख देगा तब वह वही भस्म हो जाएगा ऐसा कहते ही महादेव ने उसकी मनोकामना पूर्ण की और तभी कैलाश पर्वत पर मां पार्वती को देखकर वह मोहित हो गया और उनको पाने के लिए महादेव के पीछे महादेव को भस्म करने के लिए दौड़ पड़ा अब महादेव संकट में पढ़ गये थे इसी संकट को देख कर बैकुंठपुर में विश्राम कर रहे श्रीहरि ने जब महादेव को देखा तो वह मोहिनी रूप धारण करके आए और अपनी मोहिनी रूप से उस असुर भस्मासुर को नृत्य करने के लिए कहा और वह भस्मासुर नृत्य में इतना मोहित हो गया कि भगवान श्री हरि विष्णु ने उसका ही हाथ उसके सिर पर रखवा दिया जिससे भस्मासुर वही भस्म हो गया और इस प्रकार श्री हरि विष्णु ने महादेव को संकट से बाहर निकाला भगवान महादेव अपने भोलेपन के कारण ही इस संकट में पड़ गये थे।









