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मोतियाबिंद के मरीज घबराएं नहीं, इलाज कराएं

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आसानी से मुफ्त में हो रहा मोतियाबिंद का ऑपरेशन

छतरपुर। अगर आपको दूर या पास का कम दिखाई दे, गाड़ी चलाने में समस्या हो और सामने वाले व्यक्ति के चेहरे के भावों को न पढ़ पाएं तो समझ लिए कि आप की आंखों में मोतियाबिंद विकसित हो रहा है, लेकिन ऐसी स्थिति में आपको घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि अब इस बीमारी का आसानी से तथा मुफ्त में इलाज उपलब्ध है। जिले के सभी शासकीय अस्पतालों में मरीज मोतियाबिंद की जांच करा सकता है और रोग की पुष्टि होने पर जिला अस्पताल आकर नि:शुल्क उपचार करा सकता है।जिला अस्पताल के सिविल सर्जन एवं नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. जीएल अहिरवार ने बताया कि जिला चिकित्सालय में मोतियाबिंद के उपचार हेतु समुचित व्यवस्थाएं हैं और तीन नेत्र रोग विशेषज्ञ चिकित्सक हैं। उन्होंने बताया कि जिले की 24 लाख आबादी के लिए 20 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों, 36 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों और 258 उप स्वास्थ्य केन्द्रों पर 270 कम्यूनिटी हेल्थ ऑफीसर तथा 14 निज सहायक हैं, जिनके द्वारा सभी अस्पतालों में मोतियाबिंद की जांच की जाती है। रोग की पुष्टि होने पर मरीज को एंबुलेंस से जिला अस्पताल पहुंचाया जाता है जहां नि:शुल्क ऑपरेशन और लैंस प्रत्यारोपण की व्यवस्था है। ऑपरेशन बाद मरीज को काले चश्मे भी नि:शुल्क प्रदान किए जाते हैं। डॉ. जीएल अहिरवार ने बताया कि आजकल बिना टांके के ऑपरेशन होता है, जिस कारण से मोतियाबिंद का उपचार और भी अधिक आसान हो गया है। मोतियाबिंद से ग्रसित मरीजों के लिए जिला असपताल में स्पेशल वार्ड बनाया गया है, जहां आंखों से संबंधित सभी प्रकार की सर्जरी और जांच की जाती है। इसके अलावा जिला अस्पताल में ही आधुनिक कम्प्यूटर मशीन से चश्मे की जांच, आधुनिक ऑटोटोनो मीटर से नेत्रों की जांच और आंख में आने वाली झिल्ली को काटने के लिए आधुनिक एनडीऑगेलेजर मशीन की सुविधा भी उपलब्ध है।काजल फायदेमंद लेकिन कैमिकल युक्त काजल से करें बचावजिला अस्पताल के सिविल सर्जन एवं नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. जीएल अहिरवार ने आंखों पर काजल लगाने के सवाल का जवाब देते हुए बताया कि, काजल लगाने के ज्यादा दुष्परिणाम नहीं है लेकिन आजकल बाजार में कैमिकलयुक्त काजल आने लगा है, जिसे लगाना नुकसानदायक साबित हो सकता है। इसके अलावा गंदे हाथों से काजल लगाना भी गलत है। दरअसल यदि गंदे हाथों से कोजल लगाया जाता है तो वैक्टीरिया आंखों में चले जाते हैं जो हानिकारक होते हैं। उन्होंने बताया कि कपूर, पुदीना और खीरा को मिलाकर बनाया जाने वाला काजल आंख को ठण्डक प्रदान करता है। जो लोग मोबाइल और कम्प्यूटर का अधिक इस्तेमाल करते हैं उनके नेत्रों में रूखापन होने की संभावना बढ़ जाती है, ऐसे में काजल लगाना उचित है। उन्होंने बताया कि काजल एक प्रकार सॉफ्ट और क्रीमी प्रोडक्ट है, जिसे पुराने-जमाने में घर पर बनाया जाता था, और यह आंखों के लिए लाभकारी होता था।

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