
छतरपुर। श्री मद भागवत महापुराण की कथा में व्यास जी ने माखन चोरी के प्रसंग में बताया कि माखन ही लोभ है। ब्रज गोपिकाओं के अंदर काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मच्छर, अहंकार रूपी जो विकार थे उन्हें माखन के रूप में चुरा कर के उन्हें जन्म जन्मांतर के लिए पवित्र कर दिया। कालिया मर्दन के प्रसंग में महाराज जी ने बताया कि भगवान श्री कृष्ण ने गेंद के बहाने कालिया नाग को यमुना जी से निकालकर यमुना जी को पवित्र कर दिया। ठीक इसी प्रकार संत विद्वान अपने कथा एवं प्रवचन के माध्यम से मनुष्य के अंदर बैठे हुए विकार रूपी विषैले सर्प को निकाल कर उन्हें हमेशा के लिए पवित्र कर देते हैं। अब विदेशी भी भारतीय सनातन संस्कृति से जुडऩा चाहते हैं। क्योंकि भारतीय सनातन संस्कृति में उनको सुख एवं आनंद की अनुभूति होती है लेकिन कुछ भारतीय विदेशी संस्कृति को अपनाने में होड़ लगा रहे हैं जो कि गलत है सात साल की अवस्था में भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रज वासियों की रक्षा की हम सनातनियों को भी चाहिए कि एक दूसरे की मदद करने की आदत डालें।प्रभु की परीक्षा नहीं प्रतीक्षा करनी चाहिएईशानगर में चल रही साप्ताहिक श्री मद भागवत महापुराण की कथा में व्यास जी ने महारास लीला की कथा सुनाते हुए कहा कि कामदेव की पराजय का नाम ही महारास है भगवान पर किसी को संदेह नहीं करना चाहिए और ना ही भगवान की परीक्षा लेनी चाहिए केवल भगवान की प्रतीक्षा करना चाहिए। जिसने जिसने भी भगवान की परीक्षा ली है उसे नुकसान ही उठाना पड़ा भगवान की कथा हर तरफ मंगल करने वाली होती है हनुमान जी से हमें यह शिक्षा लेनी चाहिए कि राष्ट्र एवं समाज हित में छोटा भी बनना पड़े तो बन जाना चाहिए महाराज जी ने कथा के माध्यम से महारास कंस बध गोपी उद्धव संबाद एवं रुक्मिणी श्री कृष्ण विवाह की कथा सुनाई श्री कृष्ण विवाह उत्सव में पूरा पंडाल भक्ति मय रहा।








