टीकमगढ़। प्रदीप खरे। बहुमुखी प्रतिभा के धनी अजयकांत फणीन्द्र ने देहदान कर निश्चित ही सराहनीय कार्य किया है। दया और सेवा के क्षेत्र में अपनी अनोखी पहचान बनाने के साथ ही वह एक कवि, साहित्यकार एवं समाजसेवी के रूप में जाने जाते हैं। उनका यह निर्णय औरों के लिए अनकरणीय है। देहदान करने से चिकित्सीय क्षेत्र के लिए उनका यह योगदान लंबे समय तक याद किया जाएगा। यह विचार देहदानी अजयकांत के बारे में विचार व्यक्त करते हुए स्थानीय विधायक एवं पूर्ण मंत्री यादवेन्द्र सिंह ने व्यक्त किए। उन्होंने अजयकांत की इस पहल की मुक्त कंठ से सराहना की। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि राजनीतिक क्षेत्र की उन्हें बेहतर जानकारी रही है, जिसका लाभ उन्हें हमेशा मिलता रहा है। यहां बता दें कि स्थानीय बड़ागांव निवासी शिक्षक अजयकांत फणीन्द्र इन दिनों काफी अस्वस्थ्य चल रहे हैं। श्री फणीन्द्र ने अधिष्ठाता, बुंदेलखंड चिकित्सा महाविद्यालय सागर मप्र को दिए गए अपने फार्म में देहदान करने के फैसले से अवगत कराया है। शिक्षक अजय कान्त जैन फणीन्द्र एक बेहतर शिक्षक होने के साथ ही मंच संचालक, गायक एवं गीतकार भी हैं। वह समाजसेवा के क्षेत्र में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आ रहे हैं। उन्होंने फार्म भरते हुए कहा है कि वह मृत्यु के बाद अपनी संपूर्ण देह मेडीकल कॉलेज के छात्रों को शिक्षण हेतु दान करते हैं। इसके लिए उन्होनें अपने करीबी रिश्तेदारों का अनापत्ति प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत किया है। उनकी धर्मपत्नी ने कहा है कि उनके पति अजय कान्त जैन उम्र 62 वर्ष मृत्यु के बाद देह एनाटॉमी विभाग, बुंदेलखंड चिकित्सा महाविद्यालय, सागर के छात्रों का शिक्षण हेतु दान देना चाहते हैं। इससे हमें कोई आपत्ति नहीं है। श्री फणीन्द्र ने कहा कि उनके पथ प्रदर्शक पूर्व मंत्री यादवेन्द्र सिंह बुन्देला विधायक टीकमगढ़ हैं, जिनके मार्गदर्शन में ही सेवा एवं शिक्षा के क्षेत्र में अब तक वह पूरी निष्ठा एवं ईमानदारी से कार्य करते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रेरणा भी उन्हें विधायक श्री सिंह की सेवाभावना और कार्यशैली को देखकर ही मिली है। उनके इस कार्य में उनके पड़ोसी प्रशस्त कुमार जैन के अलाव परिवारजनों में पुत्र राहुल फणीन्द्र, पत्नी श्रीमती माया देवी जैन का सहयोग सराहनीय रहा है। धनुषधारी मंदिर के पास बड़ागांव धसान निवासी अजयकांत ने कहा कि रक्तदान,देहदान और अन्य सभी दान करने से ही जीवन सफल होता है। उन्होंने कहा कि जब तक यह जीवन है, गरीबों की सेवा करना चाहिए तथा मरणोपरान्त भी अपने शरीर का उपयोग भी बच्चों के हितों में हो, इससे अधिक और क्या चाहिए। उन्होंने अपने संदेश में अन्य लोगों से भी आग्रह किया है कि वह अपना जीवन दूसरों की सेवा में लगाएं और जीवन को सफल बनाएं। श्री फणीन्द्र के देहदानी बनने पर उनके सहयोगी एवं मित्रों ने सराहना करते हुए अपनी शुभकामनाएं दीं हैं। उनके इस फैसले का स्वागत करने वालों में अनिल खरे, राज कुमार पाठक, देवेन्द्र शुक्ला, अशोक शुक्ला, कार्तिक खरे, शिक्षक किरण खरे, अमर शर्मा, रामू शर्मा, मधुकर उपाध्याय, पूर्व पार्षद राजेन्द्र खरे बड़ागांव, अजीज खान, प्रदीप खरे पत्रकार, मुकेश सेन, राहुल खरे, गौरव शर्मा सहित अनेक लोगों के नाम शामिल हैं।









