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सावन सोमवार: कुंडेश्वर धाम पर उमड़ा भक्तों का सैलाब, गूंजे जयकारे भगवान भोलेनाथ का हुआ मनोहारी श्रृंगार, आरती और पूजा-अर्चना हुई

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टीकमगढ़। हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारा लगाते हुए भक्तों की टोलियां देर रात से ही शिव धाम कुंडेश्वर पहुंचने लगी थीं। हाथों में ध्वज थामें हुए शिव भक्त कुंडेश्वर पहुंचने लगे। यहां भक्तों ने जमढ़ार में स्नान कर भगवान शिव की पूजा-अर्चना की। प्रशासन एवं मंदिर कमेटी द्वारा यहां श्रद्धालुओं के आने-जाने के लिए बेहतर इंतजाम किए गए। पुलिस प्रशासन ने जमढ़ार नदी के साथ ही मेला परिसर एवं मंदिर प्रांगण में आने-जाने वालों पर नजर रखी। सावन के आज दूसरे सोमवार पर कुंडेश्वर के अलावा अन्य शिवालयों में विशेष पूजा-अर्चना की गई। आरती के पश्चात प्रसाद वितरण किया गया। भक्तों की हर मनोकामना पूरी करने वाले कुंडेश्वर महादेव के प्रति लाखों श्रद्धालुओं की श्रद्धा होने से यहां सैलाब उमड़ता आ रहा है। शिवधाम पर होने वाले चमत्कारों के किस्से आज भी लोगों की जुबान पर बने रहते हैं। शहर से देर रात तक भगवान भोलेनाथ के दर्शनों के लिए कतारें लगी रहती हैं। ऐसे में कुंडेश्वर मार्ग पर छाया अंधेरा दर्शनार्थियों को हमेशा खटकता रहता है। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से यहां रास्ते में छाये अंधेरे को समाप्त करने के लिए स्ट्रीट लाईट का बेहतर इंतजाम किए जाने का आग्रह किया है। कुंडेश्वर धाम जिले का प्राचीन धार्मिक स्थली है। कहा तो यह भी जाता है कि यहां वाणासुर की पुत्री ऊषा पू्रजा-अर्चना करने आती रही है। कुंड का नाम भी ऊषा कुंड उन्हीं के नाम पर पड़ा है। भगवान भोलनाथ के बढऩे को लेकर भी श्रद्धालुओं की मान्यता चली आ रही है। इतिहासकारों का कहना है कि यह मंदिर करीब आठ सौ साल पुराना है। समय के साथ-साथ यहां का पर्याप्त विकास हुआ है। कुंडेश्वर धाम पर होने वाले आयोजनों ने इस शिवालय की ख्याति दूर-दूर तक पहुंचाई है। प्रदेश सरकार द्वारा भी यहां उत्सव मनाया जाने लगा। इतना ही नहीं शिवरात्रि एवं मकर संक्रांति पर लगने वाले मेले में लाखों की संख्या में यहां श्रद्धालु आते रहे हैं। यहां रास्ते में व्याप्त अंधकार को दूर किए जाने को लेकर जिला कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय से जब चर्चा की गई, तो उन्होंने कहा कि यह मामला नगर पालिका एवं ग्राम पंचायत के बीच फंसा होने के कारण ही देरी हो रही है। मंदिर कमेटी एवं जन सामान्य से इस संबन्ध में चर्चा कर कोई न कोई हल निकालने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जल्दी ही कुंडेश्वर मार्ग पर प्रकाश के इंतजाम हों, इसके लिए जल्दी ही कुछ न कुछ किया जाएगा। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर भी यह मांग जोर पकड़े रही। दर्शनार्थियों ने यहां आने पर दर्शनों के साथ ही स्ट्रीट लाईट न जलने पर चिंता जरूर जताई। उम्मीद की जा रही है कि नगर पालिका, ग्राम पंचायत एवं प्रशासन इस दिशा में हल निकालने का जरूर प्रयास करेंगे। यहां बता दें कि तीर्थ स्थली कुंडेश्वर के विकास एवं पर्यटन स्थली को एक नई पहचान दिलाने के लिए श्री श्रोत्रिय जी ने आते ही अवलोकन कर आवश्यक निर्देश दिए थे। जिसके परिणाम स्वरूप यहां की तस्वीर बदलने के आसार दिखाई देने लगे हैं।
जलाभिषेक को उमड़ी भीड़-
टीकमगढ़ के प्रसिद्ध शिवधाम कुंडेश्वर मंदिर में श्रावण मास के दूसरे सोमवार को भक्तों की भारी भीड़ देखी गई। ब्रह्म मुहूर्त में पुजारियों ने भगवान शिव का रुद्राभिषेक किया। बताया गया है कि मंदिर का गर्भगृह सुबह 5 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोला गया। प्रधान पुजारी जमुना तिवारी ने कहा है कि यहां सुबह से ही बम-बम भोले के जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया। सुबह 7 बजे तक मंदिर में महिला और पुरुष श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। भक्तों की सुरक्षा के लिए मंदिर परिसर में विशेष इंतजाम किए गए। शाम 4 बजे के बाद गर्भगृह में प्रवेश बंद कर दिया गया। इसके बाद भगवान का श्रृंगार किया गया। शाम 7 बजे गाजे-बाजे के साथ महाआरती की गई। मंदिर परिसर में सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी गई, वहीं असमाजिक तत्वों पर भी अंकुश लगाया गया।

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