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 आंधी, बारिश से 20 हजार क्विंटल अनाज भीगा

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छतरपुर। किसान की मेहनत और पसीने की कमाई उसकी फसल के रूप में तैयार होती है यही फसल इन दिनों प्रदेश की मंडियों में पहुंच रही है। पिछले साल के मानसून के कारण गेहंू उत्पादन करने वाले जिलों में इस बार बंपर पैदावार हुई है जब किसान अपनी इसी फसल को लेकर खरीद केन्द्रों पर पहुंचे तो उन्हें मुसीबतों का सामना करना पड़ा। कई किसान हैं जो समय पर स्लॉट बुक नहीं हो पाने के कारण दुखी हैं, कई किसानों की तुलाई दो-दो दिन नहीं हो पा रही है। किसान अपनी फसल को ट्रेक्टर में लादे है और इसी दौरान बारिश हो गई तो फसल तबाह। मप्र के छतरपुर जिले में पिछले दो दिनों में ऐसे ही हालात निर्मित हुए हैं। जिले के अलग-अलग खरीद केन्द्रों पर खुले आसमान के नीचे रखा किसान का अनाज और तौल के बाद सरकार का हो चुका अनाज भीग गया है। खबर है कि लगभग 20 हजार क्विंटल अनाज इस बारिश के कारण प्रभावित हुआ है। विभाग अपनी खामियों को पॉलीथिन से छिपाने में जुटा है। अब यही भीगा हुआ अनाज ट्रकों में भरकर गोदामों में रख दिया जाएगा और जब सड़ जाएगा तब इसे फिकवा दिया जाएगा। नुकसान किसका है हमारा, आपका और किसान का।
शुरूआत करते हैं छतरपुर जिले से। यहां पिछले दो दिनों से मौसम खराब है, जमकर आंधी, तूफान और लगभग तीन बार अलग-अलग समय पर बारिश हो चुकी है। कुछ तस्वीरें हैं जो बयान कर रही हैं कि किस तरह खुले आसमान के नीचे मंडियों में रखा अनाज भीग रहा है। कुछ किसान ट्रेक्टर पर अनाज ला रहे थे तभी बारिश हो गई। अब ऐसा अनाज सरकार का नहीं है ये अनाज किसान को होता है जाहिर है नुकसान भी किसान को ही झेलना पड़ेगा।
अब बात करते हैं कि आखिर इसका जिम्मेदार कौन है?
सरकार के नागरिक आपूर्ति निगम विभाग की जिम्मेदारी होती है कि किसानों के लिए खोले गए उपार्जन केन्द्रों में तौला जाने वाला अनाज तुरंत ट्रकों से बड़े वेयर हाउस में शिफ्ट किया जाए। विभाग ने भोपाल के सुनील महेश्वरी रोड लाइन्स को छतरपुर के परिवहन का ठेका दे रखा है। खबर है कि महेश्वरी रोड लाइन्स खुद इस काम को नहीं करता है बल्कि उसने अपने नीचे गैर अधिकृत रूप से किसी पेटी ठेकेदार को यह काम दे रखा है। ठेकेदार के पास न तो पर्याप्त मात्रा में ट्रक हैं और न ही माल उठाने वाले श्रमिक। ऐसे में सारे अनाज केन्द्रों पर अनाज क्षमता से ज्यादा रखा हुआ है। तस्वीरों के जरिये एक नमूना देखिए छतरपुर के ढड़ारी उपार्जन केन्द्र का। जहां खुले आसमान के नीचे रखा अनाज भीग चुका है। सेल्समैन और यहां काम कर रहा स्टाफ इन परिस्थितियों में खामियां छिपाने के अलावा कुछ नहीं कर पा रहा है। बड़ी मात्रा में अनाज भीग चुका है और बारिश के बावजूद इसे उठाया नहीं जा रहा है जबकि मौसम अभी भी खराब ही बना हुआ है। कुछ तस्वीरें छतरपुर सेक्टर के ही घुवारा, बड़ामलहरा क्षेत्र से सामने आयी हैं यहां भी बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। आखिर इसका जिम्मेदार कौन है। किसान ने अपने हाड़तोड़ परिश्रम से जिस फसल को तैयार किया वह फसल तो भीग गई। अब वह रोएगा और अपनी छाती पीटेगा।
तीन दिन पहले छतरपुर कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने कलेक्टर कार्यालय में ही अधिकारियों की मीटिंग लेकर यह निर्देश दिए थे कि अधिकारी उपार्जन केन्द्रों का भ्रमण करें, वहां की समस्याओं को दूर करें। इन निर्देशों को छतरपुर जनसंपर्क विभाग से जारी भी कराया गया था फिर कलेक्टर की बात क्यों नहीं सुनी गई। क्या निर्देश सिर्फ हवा-हवाई ही दिए जाते हैं और कलेक्टर ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाही क्यों नहीं करते जो उनके निर्देश ही नहीं मानते।
जानकारी के मुताबिक छतरपुर जिले में इस बार लगभग 10 लाख क्विंटल गेहूं की खरीदी का लक्ष्य रखा गया है अब तक तीन लाख 525 क्विंटल गेहूं की खरीदी हो चुकी है। काफी खरीदी अब भी बाकी है। क्या आगे के लिए कोई अधिकारी सबक लेगा। क्या सुनील महेश्वरी रोड लाइन्स जैसे फर्जी ठेकेदारों पर एक्शन लिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने पिछले दिनों जनता के नाम दिए एक संदेश में ऐलान किया था कि किसानों के स्लॉट 30 अप्रैल तक नहीं बल्कि 9 मई तक बुक होंगे, एक तरफ मुख्यमंत्री ऐलान पर ऐलान किए जा रहे हैं दूसरी तरफ किसान स्लॉट बुक नहीं हो पाने की समस्या का दुखड़ा रो रहे हैं। इन सब समस्याओं का आखिर जिम्मेदार कौन है?
एक जिम्मेदार अधिकारी अभिषेक जैन से हमने बात की। अभिषेक जैन नागरिक आपूर्ति निगम के प्रभारी अधिकारी हैं, उन्हीं की जिम्मेदारी है कि समय से अनाज का परिवहन हो। फोन पर उनसे जब बात हुई तो उन्होंने स्वीकार किया कि बारिश से काफी नुकसान हुआ है और महेश्वरी रोड लाइन्स के द्वारा अनाज का सही परिवहन नहीं किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वे एक दिन पहले ही जिम्मेदारी संभालने के लिए नियुक्त हो पाए हैं, आज किए गए उनके भ्रमण के दौरान कई जगह खुले में अनाज रखा पाया गया। समाधान के तौर पर उन्होंने यह भी बताया कि हम 2700 मीट्रिक टन माल सीधा ट्रेन के जरिये बाहर भेज रहे हैं। जिन खरीद केन्द्रों पर माल पड़ा है वहां से तुरंत उठवाने के लिए महेश्वरी रोड लाइन्स को नोटिस जारी किए हैं। उन्होंने अब तक बमीठा, बसारी, घुवारा, ढड़ारी का दौरा किया है। उनके मुताबिक अब बारिश हुई तो हमारे पास अनाज छिपाने के लिए तिरपाल मौजूद है।
कुल मिलाकर उनकी यह तिरपाल इतने अनाज को कैसे बचाएगी यह तो वक्त ही बताएगा लेकिन तस्वीरें हकीकत बयान कर रही हैं। सरकार को इस मसले पर गौर करना चाहिए, जो लोग इस लापरवाही के जिम्मेदार हैं उन पर सख्त एक्शन लेना चाहिए और भविष्य में यह समस्या न हो इसके लिए त्वरित कदम उठाने चाहिए।  

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