Home डेली न्यूज़ भय और प्रलोभन से पशु प्रशिक्षित किए जा सकते, मानव को शिक्षित...

भय और प्रलोभन से पशु प्रशिक्षित किए जा सकते, मानव को शिक्षित करना अलग कार्यक्रम: लखनलाल असाटी

62
0
Jeevan Ayurveda


छतरपुर। महर्षि विद्या मंदिर में चेतना विकास पर आधारित 9 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण को संबोधित करते हुए आनंद विभाग के जिला संपर्क व्यक्ति लखनलाल असाटी ने कहा कि प्रशिक्षण और शिक्षण में बहुत अंतर है। सर्कस में रिंग मास्टर हड्डी और हंटर दिखाकर हिंसक पशुओं से भी मनचाहा करतब करा लेता है। यह एक तरह का कौशल प्रशिक्षण है परंतु छात्र के समग्र विकास के लिए मूल्य आधारित शिक्षण की आवश्यकता है। शिक्षक को भय और प्रलोभन की जगह सही समझ और सही भाव से छात्रों का समग्र विकास करना होगा। प्रारंभ में विद्यालय के प्राचार्य सीके शर्मा ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि पहले 6 दिन चेतना विकास पर काम किया जा रहा है उसके बाद तीन दिन एकेडिमक शिक्षण पर संवाद होगा।
लखनलाल असाटी ने कहा कि मानव की मूल चाहना और उसकी पूर्ति हेतु समग्र विकास में शिक्षा की भूमिका को देखना होगा। मूल चाहना को देखेंगे तो प्रत्येक मानव निरंतर समृद्धि के साथ सुखपूर्वक जीना चाहता है। समृद्धि का अर्थ है कि मेरे परिवार की आवश्यकता से  थोड़ा अधिक मेरे पास उपलब्ध रहे जिससे कि अतिथियों का भी स्वागत कर सकें। सुख का अर्थ सुविधा से न होकर मानव में सही समझ, सही भाव, सही विचार तथा सही व्यवस्था की समझ है। उन्होंने कहा कि समझदार होने का मतलब जिम्मेदार होना है। अन्यथा मानव सूचना सम्पन्न होकर रह जाएगा। जो व्यक्ति जैसा जीता है यह उसका संस्कार है और जब अनेक लोगों के संस्कार को जोड़कर देखते हैं तो इसे संस्कृति कहते हैं।
लखनलाल असाटी ने कहा कि महत्वपूर्ण है कि छात्रों को यह बताया जाए कि उन्हें जीवन में करना क्या है। कैसे करेंगे यह तो वह आपके न बताने पर भी कर लेंगे। प्रत्येक मानव की मूल चाहना सुखपूर्वक जीने की है। सुख की सही समझ हो जाने पर वह इस हेतु क्या-क्या करना है वह कर लेगा। सुख सबके लिए एक जैसा है क्योंकि यह चेतना से जुड़ा है, शरीर को सुख का आधार मान लेंगे तो परिवार के प्रत्येक सदस्य का सुख अलग-अलग हो जाएगा तब परिवार के सतत् सुखी रहने की संभावना भी कम हो जाएगी। उन्होंने समझ, संबंध और साधन पर विस्तार से चर्चा करते हुए जानना चाहा कि अभी परिवार में संवाद का विषय साधनों की उपलब्धता है अथवा संबंधों का निर्वाह है। संबंध न होने पर एक छोटी सी जमीन के लिए भी भाईयों के बीच हिंसक विवाद हो सकता है पर संबंध ठीक रहने पर जमीन का हिस्सा महत्वपूर्ण नहीं रह जाता। प्रशिक्षण कार्यक्रम में कई जिलों के 75 शिक्षक सम्मिलित हो रहे हैं।

Jeevan Ayurveda Clinic

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here