
तमराई मोहल्ला के बर्तन कारीगर संजय ताम्रकार बताते हैं कि जिस गति से कारोबार कम हो रहा है उससे अंदाजा है कि अगले दो से तीन वर्षों बाद छतरपुर में यह कारोबार पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। संजय ताम्रकार ने बताया कि पहले छतरपुर के अलावा ग्वालियर, झांसी और मऊरानीपुर में यह कारोबार होता था लेकिन इन सभी स्थानों पर कारोबार बंद हो चुका है। मात्र छतरपुर में ही कुछ लोग तांबा-पीतल के बर्तन बनाते हैं लेकिन मांग कम होने के कारण यह लोग भी व्यापार बंद करने का मन बना चुके हैं। संजय ताम्रकार के मुताबिक नई पीढ़ी का रुझान इस व्यापार की ओर नहीं है जिसका कारण तांबा-पीतल के महंगे दाम और बाजार में इन बर्तनों की मांग का कम होना है।








