Home डेली न्यूज़ सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक रोकी जाए नामांतरण की कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक रोकी जाए नामांतरण की कार्रवाई

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अनुविभागीय अधिकारी को ज्ञापन देकर युवक ने की मांग

छतरपुर। गुरूवार को छतरपुर तहसील अंतर्गत आने वाले ग्राम पडुवन दालौन के रहने वाले उमेश कुमार दीक्षित ने बताया कि गांव में मौजूद उसकी पैत्रिक जमीन का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, लेकिन विपक्षी हाईकोर्ट का आदेश दिखाकर नामांतरण कराने का प्रयास कर रहे हैं। उमेश ने अनुविभागीय अधिकारी को ज्ञापन देकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक नामांतरण की कार्रवाई न किए जाने की मांग की है।उमेश कुमार दीक्षित ने बताया कि वर्ष 1984 में उसके स्वर्गीय दादा ने शंकर सिंह से दालौन मौजा में स्थित खसरा नंबर 1129, 1130, 1131 की जमीन खरीदी थी, जिसकी रजिस्ट्री और नामांतरण उसी समय हो गया था। इसके बाद वर्ष 2007 तक दीक्षित परिवार इस भूमि पर कृषि कार्य करते रहा। 2007 में गांव के बल्दुवा कुशवाहा और उसके परिवार ने उक्त जमीन पर जिला न्यायालय में केस दायर कर दिया, जिसका फैसला दीक्षित परिवार के पक्ष में आया। इस फैसले के विरुद्ध कुशवाहा परिवार ने एडीजे कोर्ट में सेकेन्ड अपील की थी, जिसके बाद जिले से हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। वर्तमान में प्रकरण सुप्रीम कोर्ट में है, जहां 8 जुलाई 2024 को पहली सुनवाई होना है, लेकिन कुशवाहा परिवार हाईकोर्ट का आदेश दिखाकर उक्त जमीन का नामांतरण आने नाम कराने का प्रयास कर रहे हैं। उमेश दीक्षित ने अनुविभागीय अधिकारी को ज्ञापन देकर मांग की है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट का फैसला नहीं आता तब तक हाईकोर्ट के आदेश पर नामांतरण की कार्रवाई न की जाए।

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