
जीव मात्र का कल्याण भगवत भजन से होगा: पंडित राजेंद्र दास जी महाराज
नौगांव। जीवन जीना सीखना है तो रामचरितमानस से सीखो और मरना सीखना है तो भागवत गीता से सीखो, त्रिवेणी संगम में गंगा, जमुना, सरस्वती का मिलन होता है , मिलन में गंगा जमुना तो दिखाई देती हैं लेकिन सरस्वती को कोई नहीं देख पाता, सरस्वती को देखने के लिए कई बार प्रयास करने पड़ते हैं लेकिन सफलता नहीं मिलती, इसी तरह गीता में विज्ञान, वैराग्य और भक्ति है लेकिन विज्ञान और वैराग्य तो दिखाई देता है लेकिन भक्ति नहीं दिखाई देती, भक्ति को देखने के लिए लीन होना पड़ता है। यह वचन वृंदावन धाम से आये कथा व्यास आचार्य श्री राजेंद्र दास जी महाराज ने बिलहरी गांव में चल रही सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद भागवत कथा के दौरान कही। इसके अलावा व्यास नारद संवाद परीक्षित जन्म वक्ता के दस लक्षण रसिका भूवि भाविका कुंती चरित्र विदुर मैत्री प्रसंग की कथा श्रवण कराई।
नगर से लगे ग्राम बिलहरी में सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद भागवत कथा का आयोजन चल रहा है। कथा के दूसरे दिन यज्ञाचार्य पंडित रमाकांत पटेरिया के परम कृपापात्र कथा व्यास आचार्य श्री राजेंद्र दास जी महाराज ने द्वितीय दिवस ज्ञान भक्ति वैराग्य की कथा श्रवण करते हुऐ मोक्ष प्राप्ति की कथा श्रवण कराई साथ ही व्यास नारद संवाद, परीक्षित जन्म, वस्ता के दस लक्षण, रसिका भूवि भाविका, कुन्ती चरित्र सहित विदुर मैत्री प्रसंग की कथा श्रवण कराई। कथा व्यास राजेंद्र दास जी ने बताया कि हमेशा मधुर मीठा बोलो। वाणी के सुर सुधार लो, जिस तरह कौवा दिन भर कांय कांय करता है लेकिन कोई नहीं सुनता लेकिन जब कोयल बोलती है तो सब ध्यान से सुनते हैं इसी लिए कोयल बनो कौवा नहीं।
जीव का कल्याण भगवत भजन से होगा क्योंकि जीव का जन्म प्रभु की भक्ति के लिए हुआ है, प्रभु का भजन जो जीव नहीं करता है पशु के समान होता है। अगर कल्याण चाहते हैं तो जन्म मरण के चक्कर से बचना चाहते हैं तो हरी को भेजों, भगवान का भजन का भजन ही सार है बांकी सब बेकार है। इसके अलावा कथा में कई प्रसंग सुनाये गए कथा के पश्चात भागवत जी की आरती की गई।








