
छतरपुर। महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय छतरपुर के हिंदी अध्ययनशाला एवं शोध केंद्र में हिंदी साहित्य के नव प्रवर्तक सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय जयंती गुरुवार को समारोहपूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम में डॉ हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो आनंद प्रकाश त्रिपाठी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे तथा पंडित दीनदयाल उपाध्याय शासकीय स्वशासी कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय की हिंदी विभाग की अध्यक्ष प्रो सरोज गुप्ता विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कला संकाय की संकायाध्यक्ष एवं हिंदी की विभागाध्यक्ष प्रो पुष्पा दुबे ने की। कार्यक्रम का संचालन प्रो बहादुर सिंह परमार ने किया। कार्यक्रम में हिंदी विभाग की प्रोगायत्री वाजपेई, डॉ के एल पटेल एवं संतोष रजक, नंदकिशोर पटेल, डॉ जसरथ अहिरवार एवं दिव्यांश खरे की उपस्थिति विशेष रही ।कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के पूजन तथा अज्ञेय जी के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ। सरस्वती वंदना छात्रा रेखा शुक्ला, रीता सूर्यवंशी आदि द्वारा प्रस्तुत की गई। इसके पश्चात हिंदी विभाग के शोधार्थी आशीष कुमार मिश्रा तथा स्नातकोत्तर छात्र-छात्राओं द्वारा अज्ञेय के व्यक्तित्व व कृतित्व पर विचार व्यक्त किए गए। संयोजक डॉ बहादुर सिंह परमार द्वारा अज्ञेय के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि अज्ञेय का पूरा जीवन ही संघर्षपूर्ण रहा । लोग उन्हें कवि के रूप में जानते हैं परंतु उन्होंने उन्होंने शेखर एक जीवनी जैसा उपन्यास, गैंग्रीन जैसी कई कहानियां लिखीं। इसी क्रम में डा के एल पटेल तथा प्रोफेसर गायत्री वाजपेई ने भी अज्ञेय के कृतित्व पर प्रकाश डालकर उनसे प्रेरणा लेने का आव्हान किया। विशिष्ट अतिथि डॉ सरोज गुप्ता ने अज्ञेय जी को हिंदी कविता का महत्वपूर्ण कवि निरूपित किया। मुख्य अतिथि प्रो आनंद प्रकाश त्रिपाठी ने अज्ञेय जी के जीवन जुड़ा प्रेरणास्पद संस्मरण सुनाते हुए व्याख्यान देते हुए कहा कि साहित्यकार को जीवन में जोखिम उठाना ही पड़ता है। संघर्ष और जोखिम अज्ञेय जी के जीवन में महत्वपूर्ण रहे। उन्होंने तार सप्तकों के माध्यम से प्रयोगवाद का सूत्रपात किया। अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो पुष्पा दुबे ने अज्ञेय जी के रचना संसार पर आलोक डालते हुए विद्यार्थियों से उनके साहित्य के गहन अध्ययन की अपेक्षा की।








